पश्चिमी दिल्ली

टॉयलेट मैन बिंदेश्वर पाठक का निधन

अंतिम दर्शन करने पहुंचे काफी संख्या में लोग

भारत में सर पर मैला उठाने की प्रथा को खत्म करने के लिए और शौचालय क्रांति लाने वाले, स्वच्छता के लिए काम करने वाले सुलभ इंटरनेशनल के संस्थापक बिंदेश्वर पाठक का कल निधन हो गया।  आज सुबह उनका पार्थिव शरीर पालम डाबड़ी रोड पर स्थित महावीर एंक्लेव के सुलभ इंटरनेशनल परिसर में लोगों के लिए अंतिम दर्शन के लिए रखा गया है जहां पर स्थानीय लोगों के अलावा आसपास के नेता और दूर-दूर से लोग आकर उनका अंतिम दर्शन कर रहे हैं।

आज दिन में उनके पार्थिव शरीर को लोधी कॉलोनी स्थित श्मशान घाट ले जाया जाएगा, जहां उनका अंतिम संस्कार होगा। कल सुबह इसी पालम डाबरी रोड पर स्थित सुलभ इंटरनेशनल कार्यालय पर झंड समारोह के दौरान उनकी तबीयत बिगड़ गई थी। तुरंत उन्हें एम्स हॉस्पिटल ले जाया गया, जहां उन्होंने दम तोड़ दिया।

सरल, सहज जीवन जीने वाले पाठक को लोग टॉयलेट मैन के रूप में जानने लगे थे। क्योंकि उन्होंने खुले में शौच और अस्वच्छ शौचालय को खत्म करने के लिए 53 साल पहले 1970 में सुलभ इंटरनेशनल की शुरुआत की थी। उन्हीं के प्रयासों से 10 साल पहले 19 नवंबर 2013 को संयुक्त राष्ट्र ने वर्ल्ड टॉयलेट डे को भी मान्यता दी थी।

बिंदेश्वर पाठक ने वृंदावन में रहने वाली विधवा महिलाओं के जीवन में रंग भरने की कई कोशिशें की। उन्होंने इन को मिलने वाली प्रताड़ना के खिलाफ जंग लड़ी तो सरकार को कानून बनाना पड़ा। बिंदेश्वर पाठक ने सर पर शौच उठाने की परंपरा को समाप्त करने के प्रति काफी प्रयास किए।

इस कुरीतियों को खत्म करने के लिए उन्होंने हर तरह की आवाज उठाई यहां तक की मैला उठाने वाली महिलाओं को सम्मान दिलाने के लिए यूनाइटेड नेशन की ओर से आयोजित फैशन वीक में रैंप पर एक महिला उषा को उतारा था। उसके बाद पूरे विश्व का ध्यान इनके कामों पर गया था।

सौरव शर्मा, एनएन 24 न्यूज़

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