दिल्ली

एडवोकेट की सरेआम हत्या, 123 घन्टे बाद भी तू डाल डाल मैं पात-पात पर चल रहा काम

अनुभव गुप्ता, नई दिल्ली

राजधानी दिल्ली में बदमाशों के हौसले बुलंद हैं, सरेआम फायरिंग करके, गोली मारकर फरार हो जाते हैं। तमाम CCTV फुटेज मिल जाती है, पता चल जाता है, बदमाशों के बारे में। फिर भी पुलिस की कई टीमें 123 घन्टे बाद भी दोनो शूटर में से एक को भी नही पकड़ पाती है। दिल्ली से हरियाणा राजस्थान में दर्जनों द्वारका जिला के स्पेशल स्टाफ एटीएस की टीम रेड कर चुकी है लेकिन फिलहाल बदमाश “तू डाल- डाल, मैं पात-पात” कहावत को चरितार्थ करते नजर आ रहे हैं। पुलिस की रेड पड़ने से पहले ही अपने ठिकाने से फरार हो जाते हैं। हालांकि डीसीपी द्वारका एम हर्षवर्षधन वर्धन का कहना है, की फरार बदमाश लगातार अपना लोकेशन बदल रहे हैं ठिकाना बदलकर पुलिस की पकड़ से भागने की कोशिश कर रहे हैं। लेकिन जल्दी दोनों को गिरफ्तार करके सलाखों के पीछे पहुंचा दिया जाएगा।

वहीं दूसरी तरफ सोमवार से लेकर आज वीरवार तक एडवोकेट वीरेंद्र कुमार की हत्या के विरोध में द्वारका और दूसरे जिला में वकील स्ट्राइक पर रहे और कोर्ट में काम काज नहीं किया। इन्होंने शनिवार देर शाम एडवोकेट की हत्या के बाद ही यह घोषणा कर दिया था, की इस सनसनीखेज वारदात के विरोध में वकील कामकाज बंद करके अपना विरोध जताएंगे।

गौरतलब है, की द्वारका उपनगरी में शनिवार शाम लगभग सवा 4 बजे एक एडवोकेट की गोली मारकर हत्या कर दी गई थी। दोनो आरोपी की पहचान CCTV फुटेज से हो चुकी है। दोनों हत्या और हत्या के प्रयास के मामले में आरोपी रह चुके हैं। वारदात के बाद से ही दोनो लगातार लोकेशन बदलकर फरार चल रहे हैं। द्वारका डीसीपी ने जिला के पूरे ऑपरेशन सेल की टीम को इसके हत्यारों को पकड़ने के लिए लगा दिया है। जिसमें स्पेशल स्टाफ, AATS, जेल बेल, नारकोटिक्स सेल सहित कई टीम लगी हुई है। वहीं इसके अलावा अपने स्तर पर स्पेशल सेल और क्राइम ब्रांच की टीम भी इस सनसनीखेज मामले को लेकर अपने सोर्स, टेक्निकल सर्विलांस और लोकल इंटेलिजेंस की मदद से मर्डर के आरोपियों तक पहुंचने में लगी हुई है।

पटियाला हाउस कोर्ट के एडवोकेट रहे वीरेंद्र कुमार की द्वारका सेक्टर-1 में मणिपाल हॉस्पिटल के सामने कार में गोली मारकर हत्या कर दिया गया था। जब वह अपनी गाड़ी को खुद ड्राइव करते हुए शाम 4 बजे के आसपास अकेले निकले थे। पहले से घात लगाए बाईक सवार बदमाशों ने उनको नजदीक से कई गोली मारकर हत्या कर दी थी।

उस समय से वकील विरोध कर रहे हैं, की लोगों की न्याय के लिए कोर्ट में उनकी लड़ाई लड़ने वाले वकील ही जब राजधानी दिल्ली में सुरक्षित नहीं है, फिर तो दूसरों की सुरक्षा की बात का दावा कैसे किया जाय ? वीरेंद्र पर लगभग 6 साल पहले भी रोहिणी कोर्ट के बाहर हमला हुआ था, जिसमें ये बाल बाल बच गए थे। लेकिन इनका ड्राइवर घायल हो गया था। उस मामले में पुलिस ने कई लोगों को गिरफ्तार भी किया था। फिर वीरेंद्र को पुलिस की सुरक्षा भी मिल गई थी, लेकिन कोविड के दौरान सुरक्षा समीक्षा के बाद इनकी सुरक्षा को हटा दिया गया था।

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