जुर्मदिल्ली

पहले डॉक्टर के बेटे का किडनैप किया, 20 लाख की फिरौती नही मिलने पर मर्डर किया, फिर मिली पेरोल तो गर्ल फ्रेंड की होटल में कई हत्या, क्राइम ब्रांच ने दबोचा

अनुभव गुप्ता, नई दिल्ली

मर्डर के दो मामलों में शामिल और दिल्ली पुलिस द्वारा इनामी घोषित क्रिमनल को क्राइम ब्रांच की टीम ने गिरफ्तार किया है। इसकी पहचान मंगोलपुरी के रहने वाले दीपक ( 37 ) के रूप में हुई है। यह पिछले लगभग ढाई साल से फरार चल रहा था। अपनी गर्ल फ्रेंड की हत्या के मामले में भी वांटेड था। इसकी गिरफ्तारी के लिए 50 हजार का इनाम भी घोषित था।

क्राइम ब्रांच के स्पेशल पुलिस कमिश्नर रविंद्र सिंह यादव ने बताया कि कोविड में पैरोल मिलने के बाद वह पैरोल पर जेल से निकला और भागकर एक होटल में अपनी गर्ल फ्रेंड की हत्या कर दी थी। आरोपी दीपक की दोस्ती एक लड़की के साथ थी और उसकी मांगों को पूरा करने और खुद के लेविस लाइफ जीने के लिए उसने अपने चार साथियों के साथ मिलकर रोहिणी में एक आयुर्वेदिक डॉक्टर के बेटे का अपहरण की योजना बनाई थी। उसका किडनैप करके घरौंडा, करनाल, हरियाणा ले गए और उसके पिता से 20 लाख रुपये की फिरौती मांगी। पिता के द्वारा मांग पूरी नहीं की गई तो दीपक और उनके अन्य सह आरोपियों ने मिलकर लड़के की बेरहमी से हत्या कर दी और उसके शव को घरौंदा में एक कार में फेंक दिया। उस मामले में आरोपी दीपक और उसके साथियों को आजीवन कारावास की सजा सुनाई गई थी।

इसी बीच आरोपी दीपक को कोविड महामारी के दौरान 17 अगस्त 2020 को पैरोल पर रिहा किया गया था। पैरोल पर जेल से छूटने के बाद उसे पता चला कि जिस प्रेमिका के लिए उसने डॉक्टर के बेटे का अपहरण किया था, उसने उसे धोखा देकर किसी और से शादी कर ली है। फिर दीपक ने उससे बदला लेने के लिए बहाने से अपनी गर्ल फ्रेंड को सुल्तानपुरी इलाके में स्थित एक ओयो होटल में मिलने के लिए बुलाया और चाकू से उसका गला रेतकर हत्या कर दी। इसके बाद वह होटल से फरार हो गया। इस मामले में थाना सुल्तानपुरी में 302 के तहत मामला दर्ज किया गया था।

उस मामले में भी यह फरार चल रहा था और किडनैपिंग के साथ मर्डर के मामले में आजीवन कारावास की सजा के मामले में पेरोल मिलने के बाद फरार चल रहा था। फिर कोर्ट ने भगोड़ा भी घोषित किया। दिल्ली पुलिस द्वारा उसकी गिरफ्तारी पर 50,000 रुपये का इनाम भी घोषित किया गया था।

ज्वाइंट सीपी एस डी मिश्रा की देखरेख में डीसीपी अमित गोयल के नेतृत्व में एसीपी अरविंद कुमार, इंस्पेक्टर मंगेश त्यागी, रॉबिन त्यागी, हेडकांस्टेबल सुनील शर्मा, गौरव, पवन और सवाई सिंह की टीम ने पेरोल पर भागे हुए इस शातिर क्रिमनल को दबोचने के लिए पता लगाना शुरू किया।

टेक्निकल सर्विलांस से हेडकांस्टेबल सुनील शर्मा को सूचना मिली कि दीपक मंगोलपुरी के आर-ब्लॉक में मौजूद है। इस जानकारी को वेरिफाई किया गया और टीम ने मंगोलपुरी पहुंचकर दीपक की पहचान होने पर उसे धर दबोचा। हालांकि पुलिसकर्मियों को देखते ही वह सब्जी मंडी की गलियों में भागने लगा। पुलिसकर्मियों ने उसका पीछा करना शुरू किया, तो खुद को पुलिस से घिरा हुआ देख दीपक ने पथराव शुरू कर दिया। लेकिन हवलदार सुनील और गौरव ने उसे दबोचकर गिरफ्तार कर लिया।

पूछताछ के दौरान दीपक ने खुलासा किया कि उसने खुद को पुलिस से बचाने के लिए अपनी वेश बदलकर कई राज्यो बिहार, असम, ओडिशा, पश्चिम बंगाल, आंध्र प्रदेश और उत्तर प्रदेश में रहा। गिरफ्तारी से बचने के लिए लगातार अपने ठिकाने बदल रहा था। दीपक 9वीं तक पढ़ा है, 2010 में जेल जाने से पहले वह इलेक्ट्रीशियन की नौकरी कर रहा था।

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