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Business news || शेयर बाजार में 9 महीने में 53 लाख लोग निकले ट्रेंडिंग से बाहर, क्यों ?

अनुभव गुप्ता, नई दिल्ली

एक ओर जहां ब्रोकर हर महीने नए डीमैट खाते खोल रहे हैं वहीं उनके कुछ पुराने ग्राहकों को पिछले काफी महीनों से शेयर बाजार से नकारात्मक या कोई रिटर्न नहीं मिलने के इस खेल में बने रहना मुश्किल होता जा रहा है। इकनॉमिक टाइम्स की एक रिपोर्ट में NSE के ताजा डेटा के हवाले से बताया गया है कि पिछले नौ महीनों में एक्सचेंज के एक्टिव क्लाइंट की लिस्ट लगातार छोटी होती जा रही है।

NSE पर एक्टिव क्लाइंटों की संख्या मार्च में लगातार नौवें महीने घटकर 3.27 करोड़ हो गई जो जून 2022 में 3.8 करोड़ थी। यानी इस दौरान इन्वेस्टर की संख्या में 53 लाख की कमी आई है।

इसके अलावा, तीन और ऐसे संकेत हैं जो दिखा रहे हैं कि रिटेल इन्वेस्टरों की भीड़ में ट्रेडिंग को लेकर अब वैसा उत्साह नजर नहीं आ रहा है जैसा कि देश में लगे लॉकडाउन के दौरान नजर आता था। पहला संकेत यह है कि NSE के आंकड़ों के अनुसार, वित्त वर्ष 2021-22 में 1.65 लाख करोड़ रुपये और वित्त वर्ष 2020-21 में 68,400 करोड़ रुपये की मजबूत आवक के मुकाबले वित्त वर्ष 2023 में रिटेल आवक प्रवाह पिछले तीन वर्षों में सबसे कम 49,200 करोड़ रुपये थी।

दूसरे, BSE और NSE पर रिटेल इन्वेस्टरों का औसत दैनिक कारोबार मार्च 2023 में सालाना आधार पर 29% लुढ़ककर 23,700 करोड़ रुपये हो गया। और अंत में, नए डीमैट खाते जोड़ने की रफ्तार धीमी पड़ रही है। हर महीने जोड़े जाने वाले नए खातों की संख्या महीने दर महीने आधार पर आठ फीसदी घटकर 19 लाख रह गई।

रिटेल इन्वेस्टरों की परेशानी क्या है? बाजार के अंदरूनी सूत्र बताते हैं कि पिछले डेढ़ साल में Nifty की सपाट से नीचे की तरफ की मूवमेंट कमजोर खिलाड़ियों को धीरे-धीरे बाजार से बाहर कर रही है। कोविड की वजह से लगे लॉकडाउन के दौरान वर्क-फ्रॉम होम की व्यवस्था ने युवाओं के बीच ट्रेडिंग को फैशनेबल बना दिया था, जो आसानी से अपने बॉस की ताक-झांक से दूर ऑर्डर पंच कर सकते थे।

बिना अनुभव वाले ऐसे ट्रेडर्स, जो कोविड संकट के बाद नजर आ रही एकतरफा तेजी में रातों-रात करोड़पति बनने का सपना देख रहे थे, उन्हें इस बात का पूरा एहसास हो गया है कि ट्रेडिंग और इन्वेस्टिंग का व्यवसाय आसान नजर आ सकता है लेकिन है नहीं। Wright Research की संस्थापक सोनम श्रीवास्तव बताती हैं कि स्टेबल रिटर्न और कम रिस्क की पेशकश करने वाले फिक्स्ड इनकम इन्वेस्टमेंट के बढ़ते आकर्षण ने भी बॉण्ड और फिक्स्ड डिपॉजिट की ओर लोगों को मोड़ा है। इसके अलावा क्रिप्टोकरंसी और रियल एस्टेट जैसे अल्टरनेटिव असेट क्लास के उदय ने ज्यादा रिटर्न क्षमता के साथ निवेश में विविधता का लाभ मुहैया कराया है।

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