जुर्मदिल्लीद्वारका

cheater arrest || प्लम्बर के लिए ऑनलाईन सर्च से बचें, कहीं अगला शिकार न बन जाएं ?

अनुभव गुप्ता, नई दिल्ली

द्वारका जिला के साइबर थाना की पुलिस टीम ने धोखाधड़ी के ऐसे ऑनलाइन मामले का खुलासा किया है जिसमें लोगों को पलंबर और दूसरे घरेलू काम के लिए संपर्क करके उन्हें चिट किया जाता था। यह लोग गूगल पर फेक ऐड बनाकर और हेल्पलाइन नंबर डालकर लोगों को टारगेट करते थे। मास्टरमाइंड को झारखंड के देवघर से गिरफ्तार किया गया और इसके पास से वारदात में इस्तेमाल मोबाइल, सिम भी पुलिस ने बरामद किया है। गिरफ्तार किए गए आरोपी की पहचान मनतेज अंसारी के रूप में हुई है, या झारखंड देवघर का रहने वाला है।

डीसीपी एम हर्षवर्धन ने बताया कि 29 मार्च को साइबर थाना द्वारका में एक शिकायत दर्ज कराई गई थी। जिसमें एक पीड़ित ने बताया कि उन्हें घर में वाटर लीकेज की समस्या को दूर करने के लिए पलंबर की जरूरत थी। उन्होंने गूगल पर सर्च किया उसपर नंबर मिला जब उस नंबर संपर्क किया तो उन्होंने एक एप्लीकेशन डाउनलोड करने के लिए कहा। रजिस्ट्रेशन के लिए 10 रुपये फीस के रूप में जमा करने के लिए कहा। उसके बाद उनके अकाउंट से 8600 निकल गए, जब पीड़ित ने उस नंबर पर संपर्क करके बताया कि अकाउंट से पैसे निकल गए, तो उधर से रिप्लाई दिया गया कि मिस्टेक से ऐसा हुआ है।

लेकिन उसके बाद फिर उनके अकाउंट से तीन अलग-अलग अमाउंट और निकल गए। कुल 81130 उनके अकाउंट से निकल गए। इस मामले की शिकायत मिलने पर एसीपी राम अवतार की देखरेख में एसएचओ साइबर जगदीश, सब इंस्पेक्टर विकास कुमार, हेडकांस्टेबल कुलदीप और प्रवीण की टीम ने छानबीन शुरू की। पता चला कि शिकायतकर्ता के डेबिट कार्ड से अलग-अलग जगह ऑनलाइन शॉपिंग की गई है।

फ्लिपकार्ट और जिओमार्ट से खरीदारी की डिटेल ली गई उस डिटेल के आधार पर जांच की गई तो ईमेल का आईपी एड्रेस मिला और जांच करती हुई पुलिस टीम मानतेज अंसारी तक पहुंची। पुलिस टीम ने उसके ठिकाने पर छापा मारकर उसे दबोचा, उसके पास से सिम और मोबाइल बरामद किए गए। झारखंड से उसे ट्रांजिट रिमांड पर लेकर पुलिस दिल्ली आई।

यहां से पुलिस रिमांड पर लेने के बाद पूछताछ हुई तो उसने बताया कि वह गूगल ऐड पर अपना हेल्पलाइन नंबर डालकर लोगों को डॉमेस्टिक हेल्प के लिए जानकारी देता था। जो लोग सम्पर्क करते उनको बेवकूफ बनाकर उनसे चिटिंग करता था। इसके लिए वह स्क्रीन शेयरिंग एप्लीकेशन डाउनलोड करवाता था। जैसे ही एप डाउनलोड होता यह चीटर वहां से बैंक की डिटेल लेकर पिन नंबर और ओटीपी के जरिए दूसरे के अकाउंट से ऑनलाइन ट्रांसफर कर लेता। आगे और छानबीन की जा रही है।

Related Articles

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Back to top button