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दिल्ली हाइकोर्ट के आदेश पर अतिक्रमण हटाने की नगर निगम की मुहिम।

मुहिम के तहत मार्केट में हटाए जा रही सरकारी जमीनों पर बनी दुकानें

द्वारका में पिछले दिनों, सरकारी जमीनों पर अतिक्रमण को हटाने के लिए नगर निगम ने मुहिम चला कर मार्केट में अतिक्रमण कर बनाये गए दुकानों, और वहां के दुकानदारों द्वारा दुकान के सामानों को आगे बढ़ा कर रखे गए सामानों को हटाया था। इस दौरान जेसीबी मशीन का भी इस्तेमाल किया गया था। कुछ दुकानों को नुकसान भी पहुँचा था, और सामने भी जब्त की गई थी।

इसे लेकर दिल्ली सरकार और उनके विधायकों ने नाराजगी जाहिर करते हुए निगम पर कई आरोप भी लगाए थे। लेकिन जब इसे लेकर मार्केट के प्रेसिडेंट से बात की गई तो उन्होंने दिल्ली सरकार पर ही निशाना साधते हुए कहा कि उन्होंने लोगों के रोजगार के लिए कोई व्यवस्था नहीं कि।

मार्केट के प्रेसिडेंट रमेश खन्ना मार्केट ने बताया कि दिल्ली सरकार का एक शहरी विकास मंत्रालय है जिनकी यह जिम्मेदारी बनती है की दिल्ली में रहने वाले लोगों के लिए रोजगार की व्यवस्था करें। अभी दिल्ली सरकार द्वारा रोजगार बजट पेश किया गया है।

कॉरपोरेशन का काम है अतिक्रमण हटाना और इसमें जो व्यापार करने वाले लोग हैं, उनके लिए रोजगार की व्यवस्था करना दिल्ली सरकार का काम है। दिल्ली सरकार ने इसके लिए अभी तक कोई व्यवस्था नहीं की है।

उन्होंने बताया कि दिल्ली सरकार ने अपने 8 साल के कार्यकाल में, कोई सामुदायिक भवन, कोई व्यापारिक मार्केट नहीं बनाई
केवल आलोचना कर देना, धरना-प्रदर्शन और बुलडोजर का शोर मचाने से समस्या का समाधान नहीं होता है। नगर निगम अपना काम कर रही है।

दिल्ली सरकार अपना काम बताएं की उन्होंने दिल्ली के व्यापारियों के लिए क्या किया है? अभी भी 351 सड़कों पर व्यापारी बैठे हैं और उनके ऊपर तलवार लटक रही है। छोटे छोटे दुकानदार जो दिल्ली में कहीं बैठकर व्यापार कर रहे हैं उनके लिए दिल्ली सरकार ने कुछ भी नहीं सोचा है।

निगम की कार्रवाई पर उन्होंने कहा कि नगर निगम, अतिक्रमण को हटा रही है। ये निगम का काम है। लेकिन दिल्ली सरकार भी तो अपना काम करें। सड़क के किनारे व्यापार करने वाले छोटे-छोटे दुकानदारों के लिए सरकार रोजगार-व्यापार नीति बनाये। और अगर सरकार अपना काम नहीं करती है तो उन्हें किसी की आलोचना भी नहीं करनी चाहिए।

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