पश्चिमी दिल्ली

IGI एयरपोर्ट देश का पहला एयरपोर्ट बना,,,

विमानों के आवाजाही के लिए एलिवेटेड टैक्सी-वे सुविधा हुई,,,

दिल्ली के आईजीआई इंटरनेशनल एयरपोर्ट पर चल रहे विस्तार कार्य का तीसरा फेज के तहत चल रहे एलिवेटेड ईस्टर्न क्रॉस टैक्सी-वे (ईसीटी) का निर्माण कार्य को पूरा कर लिया गया है। इसी 13 जुलाई को केंद्रीय उड्डयन मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया नवनिर्मित संरचना का उद्घाटन करेंगे। IGI एयरपोर्ट देश का पहला एयरपोर्ट बन गया है, जहां विमानों के आवाजाही के लिए एलिवेटेड टैक्सी-वे की सुविधा है।

टीएनटी और आरडीएक्स जैसे विस्फोटकों से भी है सुरक्षित
इस निर्माण कार्य को पूरा करने वाली दिल्ली इंटरनेशनल एयरपोर्ट लिमिटेड (डायल) के अनुसार एयरपोर्ट मार्ग को 8 मीटर ऊंचे पुल पर तैयार किया गया। इस एलिवेटेड टैक्सी-वे का आधार 156 चौड़े खंभों पर टिका है। जिसके निर्माण में विशेष रूप से तैयार करवाए हुए कुल 590 स्टील के गार्डर का उपयोग किया गया है। इनमें से हर गार्डर का वजन 90 मीट्रिक टन है। इतनी मजबूती से बनाया गया है, की यह संरचना भूकंप के तेज झटकों को झेलने के साथ ही टीएनटी और आरडीएक्स जैसे विस्फोटकों से भी सुरक्षित रह सकता है, जिसकी जांच मुंबई IIT के एक्सपर्ट द्वारा की गई है।

एक साथ एक समय में गुजर सकता है 2 ए-380 फ़लाइट

यह एलिवेटेड टैक्सी-वे इतना चौड़ा है कि इसपर से एक बार में दो सबसे बड़े यात्री विमान ए-380 गुजर सकता है। इसकी कुल लंबाई करीब 2.1 किमी और चौड़ाई 202 मीटर है। इसके अलावा B- 777 और B- 747 एस विमान भी आसानी से गुजर सकता है। दो लेने वाले इस टैक्सी-वे के प्रत्येक लेन की चौड़ाई 44 मीटर है. और इनके बीच में 47 मीटर की दूरी है। इसके अलावा इसके ऊपर किसी इमरजेंसी की स्थिति में विमान के होने के दौरान फायर, एंबुलेंस और टो ट्रैक्टर के पहुंचने के लिए लेन बनाए गए हैं।

आपस में जुड़ जाएंगे टर्मिनल-1 और टर्मिनल-3

एलिवेटेड टैक्सी-वे पर ऑपरेशनल फंक्शन के शुरू होने पर टर्मिनल-1 और टर्मिनल-3 आपस में जुड़ जाएंगे। इसके शुरू होने से टर्मिनल-3 में अधिक विमानों की आवाजाही हो सकेगी। इसका सीधा असर रनवे पर विमानों की ट्रैफिक कम हो जाएगी और उड़ानों के संचालन में विलंब की समस्या से निजात मिलेगा। क्योंकि टैक्सी-वे पर जगह नहीं मिलने के कारण कई विमानों को टर्मिनल के पास खड़ा कर दिया जाता है।

हरेक बार में 350 लीटर एविएशन फ्यूल की होगी बचत

जीएमआर ग्रुप के डिप्टी एमडी के. प्रभाकरण ने बताया कि डायल का उद्देश्य साल 2030 तक आईजीआई एयरपोर्ट पर कार्बन उत्सर्जन को जीरो तक पहुंचाना है। यह नवनिर्मित टैक्सी वे इसमें एक बड़ा माध्यम होगा। इस टैक्सी-वे का उपयोग कर विमान को टर्मिनल-3 से टर्मिनल-1 तक नॉर्थ से साउथ एयरफिल्ड तक ले जाने के दौरान पहले के मुकाबले अब एक विमान को 7 किलोमीटर की कम दूरी तय करनी होगी। इससे एक बार में लगभग 350 लीटर एविएशन फ्यूल की बचत होगी। इससे होने वाले करीब 1114 किलो सीओ 2 के उत्सर्जन में कमी आएगी। वहीं औसतन सालाना 55000 टन सीओ 2 के उत्सर्जन में कमी आएगी।

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