दिल्ली

LG हाउस में तैनात हेडकांस्टेबल की बेटी बनी फ्लाइंग ऑफिसर, लाई 5 वी रैंक लडकियों में कैसे ?

अनुभव गुप्ता, नई दिल्ली

दिल्ली पुलिस में हेड कांस्टेबल के पद पर तैनात ललित कुमार जो अभी एलजी हाउस में पोस्टेड हैं, उनकी बेटी कोमल दहिया ने एनडीए एग्जाम कंप्लीट कर फ्लाइंग ऑफिसर बन गई है। उसने अपने परिवार का, अपने गांव का और दिल्ली पुलिस के परिवार का नाम रोशन किया है। एनडीए में लड़कियों का यह 3rd बैच था, जिसमें इसने लड़कियों में पांचवा रैंक हासिल किया है। लड़की और लड़कों को मिलाकर टोटल में से 34 वां रैंक मिला है।

लड़कियों के लिए फ्लाइंग ऑफिसर का 2 सीट था, उसमें यह फर्स्ट नंबर पर आई है। कोमल दहिया की उम्र अभी 17 साल है। मार्च में उसने 12वी का भी एग्जाम दिया है, जिसका रिजल्ट आना अभी बाकी है। NDA का रिटेन एग्जाम पिछले साल सितंबर में हुआ था और फाइनल इंटरव्यू, मल्टीपल टेस्ट, फिजिकल टेस्ट इस साल जनवरी में हुआ था। परिवार के लोग, गांव के लोग और दिल्ली पुलिस परिवार कोमल दहिया की सफलता से गौरवान्वित है।

कोमल के पिता ललित कुमार 2008 में कॉन्स्टेबल के रूप में दिल्ली पुलिस में भर्ती हुए थे। उसके बाद 2018 में हेड कांस्टेबल के रूप में इनकी पदोन्नति हुई। पिछले लगभग 3 साल से इनकी पोस्टिंग एलजी हाउस में है। यह मूलत हरियाणा के सोनीपत जिला स्थित सिसाना गांव के रहने वाले हैं। उनके परिवार में पत्नी और दो बच्चे हैं। बड़ा बेटा ग्रेजुएशन कर रहा है और छोटी बिटिया कोमल दहिया सोनीपत के ऋषि कुल विद्यापीठ से 12वीं कर रही है।

कोमल ने बताया कि पहले NDA में लड़कियों के लिए ऑप्शन नहीं था। जब वह 11वीं क्लास में थी, तब पता चला कि अब NDA में भी लड़कियों के लिए ऑप्शन आ गया हैं, तो उसने तभी से तैयारी शुरू कर दी थी। एनडीए के जरिए एग्जाम कंप्लीट करके फ्लाइंग ऑफिसर बनने का मन में ठान लिया था। पहली कोशिश में उसने एग्जाम क्लियर किया और एनडीए के जरिए फ्लाइंग ऑफिसर बनने वाली देश की पांचवीं महिला फ्लाइंग ऑफिसर बन गई है। इससे पहले एनडीए के दो महिलाओं के बैच में चार लड़कियां फ्लाइंग ऑफिसर बन चुकी है। उन सबकी ट्रेनिंग चल रही है। कोमल की ज्वाइनिंग जुलाई में है और इनकी ट्रेनिंग पुणे में शुरू होगी और उसके बाद हैदराबाद में आगे की ट्रेनिंग कम्प्लीट होगी।

कोमल के पिता ललित कुमार काफी खुश हैं और इन्होंने कहा कि जब बिटिया ने एनडीए एग्जाम को लेकर तैयारी करने की बात कहीं तो मैंने एक ही चीज कहा कि जिसमें सेटिस्फेक्शन हो और जो तमन्ना हो उसी चीज पर ध्यान लगाओ सफलता जरूर मिलेगी। मैं और भी पेरेंट्स को कहना चाहता हूं कि आपके बच्चे जिस लाइन में जाना चाहते हैं, उसी लाइन के लिए उन्हें सपोर्ट करिए बच्चे सफल होकर परिवार का, गांव का देश का नाम जरूर रोशन करेंगे।

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