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RSS चीफ मोहन भागवत का जनसंख्या पर बड़ा बयान, बोले केवल आबादी बढ़ाना जानवरों का काम

आरएसएस चीफ मोहन भागवत ने जनसंख्या नियंत्रण पर बड़ा बयान देते हुए कहा कि, सिर्फ खाना और जनसंख्या बढ़ाने का काम तो जानवर भी करते हैं. सिर्फ जिंदा रहना ही जिंदगी का उदेश्य नहीं होना चाहिए.

नई दिल्ली. देश में इस वक्त तेजी से बढ़ती जनसंख्या एक बड़ा मुद्दा बनती जा रही है. संयुक्त राष्ट्र संघ की एक रिपोर्ट में भी यह बात सामने आई है कि, अगले साल यानी 2023 तक भारत दुनिया की सबसे बड़ी आबादी वाला देश बन जाएगा. यूनाइटेड नेशंस द्वारा जारी इस रिपोर्ट में यह दावा किया गया है कि, अगले साल तक भारत आबादी के मामले में चीन को पीछे छोड़ देगा. अब आरएसएस यानी राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के प्रमुख मोहन भागवत ने जनसंख्या नियंत्रण पर अपनी राय दी है.

क्या कहा मोहन भागवत ने 

आरएसएस चीफ मोहन भागवत ने जनसंख्या नियंत्रण पर बड़ा बयान देते हुए कहा कि,  सिर्फ खाना और जनसंख्या बढ़ाने का काम तो जानवर भी करते हैं. सिर्फ जिंदा रहना ही जिंदगी का उदेश्य नहीं होना चाहिए. मनुष्य के कई कर्तव्य होते हैं.

एक कार्यक्रम को संबोधित करते हुए मोहन भागवत ने कहा कि मनुष्य के पास अगर बुद्धि नहीं होती तो वो पृथ्वी पर सबसे कमजोर प्राणी होता, लेकिन कभी संज्ञानात्मक आवेग मनुष्य के जीवन में आया जिसने उसे सर्वश्रेष्ट बनाया मगर केवल खाना-पीना और प्रजा बढ़ाना, ये काम तो पशु भी करते हैं.

उन्होंने कहा कि, जो ताकतवर है वो जीवन जी लेगा, यह जंगल का कानून है लेकिन मनुष्यों की व्याख्या है कि सबसे योग्य व्यक्ति दूसरों को जीने में मदद करेगा. आरएसएस चीफ भागवत कर्नाटक के चिकबल्लापुरा जिले के मुद्देनहल्ली में सत्य साईं ग्राम स्थित ‘श्री सत्य साईं यूनिवर्सिटी फॉर ह्यूमन एक्सीलेंस’ के पहले दीक्षांत समारोह को संबोधित कर रहे थे. जहां उन्होंने ये बातें कहीं.  अपने वक्त्वय में भागवत ने यह भी कहा कि, अगर किसी ने 10-12 साल पहले कहा होता कि भारत आगे बढ़ेगा तो हम इसे गंभीरता से नहीं लेते.’’

राष्ट्र की प्रक्रिया तत्काल शुरू नहीं हुई, यह 1857 से है, जिसे स्वामी विवेकानंद द्वारा आगे बढ़ाया गया. संघ प्रमुख ने कहा कि आध्यात्मिक साधनों के जरिये उत्कृष्टता प्राप्त की जा सकती है क्योंकि विज्ञान अभी तक सृष्टि के स्रोत को नहीं समझ पाया है.

विवादों के बीच आगे बढ़ रही दुनिया

भागवत ने कहा कि मौजूदा विज्ञान में बाहरी दुनिया के अध्ययन में समन्वय और संतुलन का अभाव है. जिस वजह से हर जगह विवाद की स्थिति पैदा होती है. अगर आपकी भाषा अलग है, तो विवाद है. अगर आपकी पूजा पद्धति अलग है, तो विवाद है और अगर आपका देश अलग है, तो विवाद है. विकास और पर्यावरण तथा विज्ञान और अध्यात्म के बीच विवाद है. कुछ इस तरह पिछले 1,000 साल में दुनिया आगे बढ़ी है.’’

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